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भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई उदार, दयालु और न्यायमूर्ति के साथ-साथ सहनशीलता की मूर्ति : सुनिल कुमार

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई उदार, दयालु और न्यायमूर्ति के साथ-साथ सहनशीलता की मूर्ति : सुनिल कुमार CJI के साथ ऐसी घटना अशोभनीय, शर्मनाक, निंदनीय, असंवैधानिक, अनुशासहीनता, कोर्ट एवं संविधान की अवमानना; दोषी वकील पर हो कार्रवाई : जनता

CJI से जुड़ी घटना भारतीय न्याय प्रणाली, संविधान, लोकतंत्र की आत्मा, कानून के शासन पर हमला असंवैधानिक

जूते उछालने वाले वकील पर कार्रवाई नही किए चीफ जस्टिस गवई, बोले – वह इस तरह की चीजों से प्रभावित नहीं होते

इस प्रकार की घटना से देश शर्मसार व चिंतित, ऐसी घटनाओं पर रोक हेतु पहल होनी चाहिए : शिक्षक सुनिल

बगहा।भारत के मुख्य न्यायाधीश पर सर्वोच्च न्यायालय में हुए हमले की निंदा करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। यह न केवल उन पर, बल्कि हमारे संविधान पर भी हमला है। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई बहुत दयालु रहे हैं। वे न्यायामूर्ति के साथ-साथ सहनशीलता की भी मूर्ति हैं। लेकिन उनके साथ हुए दुर्भाग्यपूर्ण बर्ताव से राष्ट्र को गहरी पीड़ा हुई है, लोगों में आक्रोश है। देश को उनके साथ एकजुटता से खड़ा होना चाहिए। ऐसी घटना से देश शर्मसार है। सुप्रीमकोर्ट, CJI के लिए ऐसी हरकत, घटना अशोभनीय, निंदनीय, असंवैधानिक, अनुशासहीनता तथा कोर्ट एवं संविधान की अवमानना जैसा है, लोकतंत्र में ऐसी घटना कदापि नही होनी चाहिए।इस पर चिंतन कर रोक के लिए सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि इस प्रकार की अन्य घटनाओं की पुनारावृत्ति न हो। उक्त बातें स्थानीय शिक्षक सुनिल कुमार ने क्षोभ प्रकट करते हुए कहा।शिक्षक ने आगे कहा कि देश में ऐसी प्रवृत्ति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जो भविष्य के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न करे अथवा बन जाए।खबर के अनुसार, 06 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश (CJI) बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाला वकील राकेश किशोर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान उन्हें किसी भी न्यायालय, ट्रिब्यूनल या अधिकरण में पेश होने, वकालत करने या पैरवी करने की अनुमति नहीं होगी। BCI ने आरोपी वकील का लाइसेंस रद्द कर दिया है।

*वकील के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई*

BCI ने बताया कि इस मामले में वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके तहत उन्हें 15 दिन के भीतर यह बताने का नोटिस (शो कॉज़ नोटिस) जारी किया जाएगा कि क्यों यह कार्रवाई जारी नहीं रखी जानी चाहिए। नोटिस के जवाब और मामले की जांच के आधार पर काउंसिल उचित और आवश्यक आदेश पारित करेगी।वहीं, जूता फेंकने की कोशिश करने वाला वकील राकेश किशोर पर CJI बी आर गवई कोई कार्रवाई नहीं चाहते। यह क्षमाशीलता उनकी महानता, उदारता भले हो लेकिन इससे अन्य लोगों का मनोबल प्रभावित होगा। ऐसे सनकी/ पुर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति पर यथोचित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे अन्य कोई घटना न हो।सुप्रीम कोर्ट में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, CJI ने रजिस्ट्री अफसरों से कहा कि इस घटना से बस उपेक्षित या उदासीन रहा जाए। इसे इग्नोर किया जाए। भोजनावकाश के दौरान CJI जस्टिस बी आर गवई ने कोर्ट में हुई घटना को लेकर सेक्रेटरी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के सिक्योरिटी इंचार्ज और अन्य के साथ मीटिंग किए। मीटिंग में सतर्कता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।बता दें कि CJI पर कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश करने वाला वकील राकेश किशोर को छोड़ दिया गया।दिल्ली पुलिस ने कोर्ट परिसर में ही उसे हिरासत से छोड़ दिया। BCD दो दिनों के भीतर इसके अनुपालन की रिपोर्ट BCI मे दाखिल करेगा।वकील की पहचान राकेश किशोर के रुप में हुई है। वह सीजेआई बीआर गवई के डाइस के करीब पहुंचे और जूता उतारकर फेंकने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते उसे रोक लिया।इस घटना की निंदा व्यापक रूप से हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गाँधी और कई वकीलों ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” बताया।न्यायपालिका, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वकीलों ने इस घटना की निंदा की और इसे न्यायपालिका पर हमला बताया।उधर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने राकेश किशोर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है।किशोर को हिरासत में लिया गया था, लेकिन गवई द्वारा कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।जस्टिस गवई ने कहा कि वह इस तरह की चीजों से प्रभावित नहीं होते। यह व्यवहार उनके दयालुता, क्षमाशीलता व दृढ़निश्चता और आंतरिक मजबूती को परिलक्षित करता है।कुछ व्यक्तियों और विपक्षी दलों ने इस घटना के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह “घृणा फैलाने” और “संस्थानों के प्रति सम्मान को कमजोर करने” का परिणाम है। हालांकि इसका कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ।इस प्रकार की घटना देश को शर्मसार व चिंतित करने वाली है। ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए नही तो कल होकर अन्य कोई शीर्ष व्यक्ति भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे कुत्सित मानसिकता के लोग लोकतंत्र या स्वतंत्रता का ऐसा अर्थ कदापि न निकालें कि किसी के साथ अनुचित दुर्व्यवहार करें। सुप्रीम कोर्ट, केंद्र व राज्य सरकार, शीर्ष नेतृत्व, संस्थान, संसद आदि को इस पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

 

 

 

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