रामनगर डैनमवरा के उमेश शर्मा की कहानी अद्भुत:40 लाख रुपया खेत बेचकर ईलाज मे लगाने के बाद भी पैर काटने को सर्जन से मिला सुझाव,होमियोपैथी चिकित्सक पर जताया भरोसा,मिला नया जीवनदान।
रामनगर डैनमवरा के उमेश शर्मा की कहानी अद्भुत:40 लाख रुपया खेत बेचकर ईलाज मे लगाने के बाद भी पैर काटने को सर्जन से मिला सुझाव,होमियोपैथी चिकित्सक पर जताया भरोसा,मिला नया जीवनदान।
—- मरीजों के आशा का केंद्र बिंदु बना बगहा का होमियो कैंसर सेवा अस्पताल!
बिहार डेस्क,बगहा।बगहा अनुमंडल अंतर्गत रामनगर क्षेत्र के डैनमवरा निवासी उमेश शर्मा की कहानी सचमुच अद्भुत है!फिमोरल आर्टरी अन्यूरिसम् नाम की बीमारी का चार बार आपरेशन के बाद भी स्थिति बिगड़ने के बाद मरीज उमेश शर्मा को सर्जन द्वारा पैर को काटने की सलाह दी गयी। लेकिन बगहा नगर के नारायणपुर स्थित होमिया कैंसर सेवा अस्पताल बगहा-02 में मरीज उमेश ने होमियोपैथी के शरण मे पहुंचकर होम्योपैथिक चिकित्सक के पैर नही काटने के आश्वासन पर होमियोपैथी उपचार को अपनाया और तीन वर्ष पश्चात मरीज अपने पैरो पर खड़ा है।होमियोपैथी ईलाज के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।उमेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने रामनगर, नरकटियागंज और बेतिया में अंग्रेजी दवा ली, लेकिन सुधार न होने पर पटना ले जाया गया, जहां नस काटने और सर्जरी जैसे गंभीर उपचार किए गए। उन्होंने कहा कि इलाज में घर, जमीन और करीब दस लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर किया, जहां भी नस काटकर सर्जरी की गई और कहा गया कि पैर काटे बिना कोई रास्ता नहीं है। होमियोपैथिक के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पदम भानु सिंह ने बताया कि जब मरीज उनके पास लाया गया, तब उसके पास चार शल्य चिकित्सकों की पर्ची थी और उसके बयान के अनुसार करीब तीस लाख रुपये ईलाज में खर्च हो चुके थे। फिमोरल आर्टरी अन्यूरिसम् नाम की बीमारी उसका वजन 22 किलो रह गया था और दो दिन बाद उसका पैर काटा जाना था। जांच के बाद मैंने मरीज उमेश शर्मा को भरोसा दिलाया कि ईलाज संभव है। आज मरीज सामान्य व्यक्ति की तरह चलने-फिरने में सक्षम है।वही उमेश शर्मा का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।परिवार इसे “दूसरी जिंदगी” मान रहा है,जबकि चिकित्सक इसे होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति पर मरीज के विश्वास और निरंतर ईलाज का परिणाम बता रहे हैं।


