खंडहर में तब्दील हो रहा उन्नाव की शान शौर्य व साहित्य का केंद्र बिंदु बैसवारा रेलवे स्टेशन: जो अंग्रेजों के जमाने में था मशहूर…..

खंडहर में तब्दील हो रहा उन्नाव की शान शौर्य व साहित्य का केंद्र बिंदु बैसवारा रेलवे स्टेशन: जो अंग्रेजों के जमाने में था मशहूर…..

उन्नाव के बीघापुर तहसील मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित बैसवारा रेलवे स्टेशन, जो कभी अंग्रेजों के जमाने में एक महत्वपूर्ण रेलवे केंद्र था, अब अपनी बदहाली की कहानी सुना रहा है। स्टेशन का भवन धीरे-धीरे जर्जर होकर खंडहर में बदल चुका है, और इसके पीछे प्रमुख कारण रेलवे विभाग की लापरवाही और कुछ ट्रेनों के ठहराव रद्द कर दिए जाने से स्थानीय लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बैसवारा रेलवे स्टेशन बिहार कस्बे में स्थित है और यह उन्नाव, रायबरेली, इलाहाबाद, दिल्ली, और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ था। एक समय यह स्टेशन न केवल यात्रीगण के लिए, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों, मजदूरों और कचहरी में मामलों के लिए यात्रा करने वालों के लिए भी एक अहम केंद्र था। लोग यहां से अपनी रोजमर्रा की यात्रा करते थे और यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता था। लेकिन समय के साथ रेलवे विभाग की उपेक्षा और ट्रेनों के ठहराव में कमी ने इस स्टेशन के महत्व को कम कर दिया है। अब स्टेशन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी मरम्मत की कोई दिशा नहीं नजर आ रही है। जर्जर स्थिति और मरम्मत की कमी बैसवारा रेलवे स्टेशन का भवन अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। एक समय में जो विशाल और आकर्षक था, वह अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्टेशन की छतें और दीवारें टूट-फूट चुकी हैं, और स्टेशन पर मौजूद सुविधाएं भी पूरी तरह से नजरअंदाज की जा रही हैं। रेलवे विभाग ने इसकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे स्टेशन की स्थिति और भी बिगड़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्टेशन की मरम्मत और ट्रेनों के ठहराव की बहाली के लिए अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो यह महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन पूरी तरह से बंद हो सकता है। इससे न केवल यात्रीगण को भारी परेशानी होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।



