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सोमनाथ की शौर्य चेतना से चंपारण की सेवा परंपरा तक , बाबु धाम ट्रस्ट द्वारा नर सेवा ही नारायण सेवा का जीवंत संकल्प”…. एपी पाठक 

सोमनाथ की शौर्य चेतना से चंपारण की सेवा परंपरा तक , बाबु धाम ट्रस्ट द्वारा नर सेवा ही नारायण सेवा का जीवंत संकल्प”– एपी पाठक

बिहार डेस्क,बगहा।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पावन अवसर पर आयोजित शौर्य यात्रा में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहभागिता भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्र की आत्मा का विराट प्रतीक है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अखंड आस्था, आत्मसम्मान और सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक है,जिसने सदियों के आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद बार-बार स्वयं को पुनः स्थापित किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ की पवित्र भूमि पर उन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना,जिन्होंने मां भारती और इस पवित्र धाम की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, केवल अतीत का स्मरण नहीं बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रवादी चेतना का सशक्त उद्घोष है। एपी पाठक ने कहा कि मोदी जी का आध्यात्मिक दृष्टिकोण काशी, केदारनाथ,अयोध्या और सोमनाथ से लेकर पूरे राष्ट्र के आत्मगौरव तक विस्तृत है, जो आज भारत को नई ऊर्जा और नई दिशा दे रहा है।बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं चंपारण क्षेत्र में जनसेवा के रुप में मैने अनुभव किया कि “सनातन संस्कृति का मूल मंत्र है “नर सेवा ही नारायण सेवा “।जब तक आध्यात्मिक चेतना समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचे, तब तक उसका पूर्ण अर्थ नहीं होता।”इसी भावना के साथ मेरे द्वारा चंपारण के लगभग कुछ लोग और जरूरतमंद को अपने निजी खर्च पर माता वैष्णो देवी, मक्का-मदीना तथा अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए भेजा गया है, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़ सके और सामाजिक समरसता मजबूत हो। जिस प्रकार सोमनाथ ने सदियों के संघर्ष के बाद भी भारत की आत्मा को जीवित रखा, उसी प्रकार चंपारण की धरती भी सत्य, त्याग और सेवा की भूमि रही है। बाबु धाम ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों, महिलाओं, वृद्धों और युवाओं के लिए चलाए जा रहे सेवा कार्य उसी सनातन परंपरा की निरंतरता हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जीवित कर रहे हैं।सोमनाथ के शहीदों का बलिदान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की आध्यात्मिक-राष्ट्रवादी दृष्टि और चंपारण की सेवा परंपरा , ये तीनों मिलकर उस भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, जो अपनी आस्था, शौर्य और मानवता के बल पर विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मेरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की यह सनातन चेतना और लोककल्याण की धारा आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारवान राष्ट्र की दिशा दिखाती रहेगी।

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