

बड़ी खबर | शुक्लागंज, उन्नाव
1997 से चली आ रही गणेश महोत्सव की परंपरा, इस बार 12 दिनों तक गूंजेगा गणपति बप्पा का जयघोष?
विशेष तिथियों के संयोग से 11 नहीं, पूरे 12 दिनों का होगा गणेश महोत्सव — धार्मिक, सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों का रहेगा संगम
सूर्या न्यूज 24 शुक्लागंज, उन्नाव से नफीस खान
शुक्लागंज में गणेश उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। वर्ष 1997 से चली आ रही पारंपरिक गणेश महोत्सव की परंपरा इस वर्ष अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर चुकी है। विशेष तिथियों के संयोग के चलते इस बार महोत्सव 11 दिनों के बजाय पूरे 12 दिनों तक आयोजित किया जाएगा।शुक्लागंज के बातू फॉर्म में आयोजित होने वाले इस महोत्सव को लेकर आयोजकों ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारा, एकता और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।आयोजकों के अनुसार, महोत्सव के शुरुआती 10 दिनों तक भगवान गणेश पंडाल में विराजमान रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रमों में गणेश सहस्रार्चन, सुंदरकांड पाठ, रुद्राभिषेक, धनुष भंग, भंडारा और भजन-कीर्तन सहित कई आयोजन शामिल हैं।
ऑपरेशन सिंदूर बनेगा विशेष आकर्षणमहोत्सव के दौरान पिछले वर्ष से शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत पूर्व सैनिकों को सम्मानित किए जाने के साथ-साथ देशभक्ति से जुड़ी झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी।
आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से नई पीढ़ी में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही नगर के प्रतिष्ठित कवि एवं ‘मिनी तुलसीदास’ के नाम से प्रसिद्ध महेश चंद्र शुक्ल जी का नागरिक सम्मान भी किया जाएगा।
11वें दिन निकलेगी भव्य शोभायात्रा महोत्सव के 11वें दिन शुक्लागंज नगर में भव्य गणेश शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।वहीं महोत्सव के 12वें दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ 12 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का समापन होगा।आयोजकों ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित गणेश महोत्सव में शामिल होकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करें और आयोजन को सफल बनाएं।
गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ शुक्लागंज में एक बार फिर आस्था, संस्कृति, भाईचारे और देशभक्ति का संगम देखने को मिलेगा।
