अचानक भरभरा कर गिरी जर्जर मकान की छत बाल बाल बचे परिवार, हिस्सेदारों के विवाद और प्रशासनिक लापरवाही से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा



अचानक भरभरा कर गिरी जर्जर मकान की छत बाल बाल बचे परिवार, हिस्सेदारों के विवाद और प्रशासनिक लापरवाही से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
हिस्सेदारों के विवाद और प्रशासनिक लापरवाही से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
पीड़िता ने कई बार शासन प्रशासन को लिखित पत्र देकर अवगत कराया
कानपुर महानगर कानपुर शहर में जर्जर और खंडहरनुमा इमारतें लगातार खतरे का सबक बन रही है। ताजा मामला कानपुर नगर के मोहल्ला पटकापुर ब्रह्मचट्टे के पास का है। जहां मकान नंबर 19/ 226 बीती रात अचानक भर भरा कर गिर गई छत गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई,वरना बड़ी त्रासदी घट सकती थी। स्थानी लोगों के मुताबिक यह मकान सदियों पुराना है और लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा है। पीड़िता ने कई बार लिखित पत्र आला अधिकारियों को देकर अवगत कराया और न्याय की गुहार लगाई। मकान कुल 6 हिस्सेदारों का है लेकिन आपसी बंटवारे के विवाद के चलते इसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया वर्षों से अटकी हुई है। बताया गया है कि एक हिस्सेदार जानबूझकर खंडहर को गिरवाने या बटवाने से रोक रहा है और पूरे पैतृक मकान पर कब्जा करने की फिराक में है यही कारण है कि घर की मरम्मत और रखरखाव लंबे समय से उपेक्षित है।
दूसरी छत भी रात में भर भरा कर गिरी
लगातार कई दिनों से बारिश होने के कारण बीती रात भारी बारिश के दौरान अचानक मकान के एक हिस्से की छत भरा भरा कर गिर गई लेकिन उस समय घर में सौभाग्य से उस छत के नीचे कोई मौजूद नहीं था। और छतअचानक भर भरा कर गिर गई। जिसकी सूचना इस मकान में नीचे रह रहे पारिवारिक रिश्तेदारों ने फोन कर सूचना दी। जिस पर मकान मालिक ने तत्काल डायल 112 को अवगत कराया और अगले दिन ही आला अधिकारियों को लिखित पत्र पुनः देकर अवगत कराया। भरभरा कर छत गिरने से किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई हालांकि सभी इस बात से चिंतित है कि यह जर्जर इमारत कभी भी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है।
बरसात में और बिगड़ी हालत
इमारत की दीवारें चारों तरफ से डगमगा चुकी हैं दो मंजिला यह इमारत त्रिपाल और पन्नियों से ढक दी गई है, ताकि बाहर से देखने पर स्थित का अंदाजा ना हो सके लेकिन भीतर रह रहे परिवारों की हालत बेहद डरी है बरसात के पानी से छतें टपक रही है और ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले परिवारों ने बांस बल्लियां तथा त्रिपाल का सहारा लेकर किसी तरह अपनी छतें सम्भाल रखी है। बरसात में पानी गिरने से घर का लगभग सभी सामान बरसात के पानी से भीग कर क्षतिग्रस्त हो रहा है। बारिश का पानी पूरे घर में घुस जाता है जिससे परिवारों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन से की गई शिकायतें
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने कई बार शासन – प्रशासन को लिखित शिकायतें दी हैं अधिकारियों को मौके की जानकारी भी है लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। हिस्सेदारों में से कुछ लोग इस जर्जर इमारत को गिरवा कर पूर्णनिर्माण करवाने की उपेक्षा में हैं मगर उनकी बात अनसुनी कर दी जाती है, वे लगातार दर-दर भटक रहे हैं और गुहार लगा रहे हैं कि कहीं देर ना हो जाए और कोई दुखद घटना घटित ना हो जाए।
कभी भी हो सकता है बड़ाहादसा
स्थानी लोगों का कहना है कि यह मकान अब मौत का फंदा बन चुका है मकान की दीवारों और छत कभी भी पूरी तरह ध्वस्त हो सकती हैं इसमें रहने वाले परिवारों की जान खतरे में है मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा तब तक अधिकारी सिर्फ औपचारिकताएं निभाते रहेंगे और बाद में सफाई देने में जुड़ जाएंगे।
सवालों के घेरे में प्रशासन
यह घटना शासन – प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है शहर में ऐसी तमाम पुरानी इमारतें हैं जो समय-समय पर खतरा बनती रहती हैं। नगर निगम और संबंधित विभागों को इन पर निगरानी रखनी चाहिए लेकिन अक्सर तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है जब तक बड़ा हादसा ना हो जाए सवाल यह है की क्या शासन – प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है❓
स्थानीय लोगों की मांग
पीड़ित परिवारों और मोहल्ले के लोगों की मांग है कि शासन – प्रशासन तत्काल इस खंडहर मकान की गहनता से जांच करें और सुरक्षा की दृष्टि से इसे खाली कराया जाए साथ ही हिस्सेदारों के विवाद को हल करके मकान का पुनर्निर्माण कराया जाए स्थाई निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कभी भी छोटे-छोटे मासूम बच्चों और परिवारों को जान खतरे में पढ़ सकती है। खबर लिखे जाने तक किसी भी प्रकार की शासन – प्रशासन की तरफ से कार्यवाही नहीं हुई।


