गंगा घाट क्षेत्र में मानकों की धज्जियां उड़ाते कृषि योग्य भूमि पर राजस्व की चोरी कर की जा रही धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग।
शुक्लागंज उन्नाव। सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले गंगा घाट थाना क्षेत्र में लगभग सभी ग्राम सभा एवं वार्ड स्तर क्षेत्र में की जा रही राजस्व की चोरी के साथ मानकों के विपरीत अवैध ढंग से कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग ।

गंगा घाट क्षेत्र में मानकों की धज्जियां उड़ाते कृषि योग्य भूमि पर राजस्व की चोरी कर की जा रही धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग।

राजेश सिंह
शुक्लागंज उन्नाव। सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले गंगा घाट थाना क्षेत्र में लगभग सभी ग्राम सभा एवं वार्ड स्तर क्षेत्र में की जा रही राजस्व की चोरी के साथ मानकों के विपरीत अवैध ढंग से कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग ।
सवाल,आम जनमानस यह सोचते होंगे की प्लाट खरीदते समय रजिस्ट्री में सरकारी स्टांप शुल्क व कोर्ट फीस के साथ अन्य वय का भुगतान किया जाता है फिर यह अवैध कैसे हमने तो पूरा भुगतान कर प्लाट खरीदा। अधिकांश प्लाट मालिक या दूसरे शब्दों में कहे तो भू माफिया के द्वारा खेला जा रहा खेल किसान से उसकी कृषि योग्य भूमि का एग्रीमेंट कर एक तरह से किस को भूमि सहित बंधक बना लिया जाता और एग्रीमेंट के बदले किसान को कुछ धनराशि का भुगतान कर दिया जाता शेष धनराशि बैनामा करते रहो और भुगतान लेते रहो पर तय हो जाता और इसी प्रकार से बैनामा और लेनदेन खेल चलता रहता । दूसरी तरफ कुछ समग्र सक्षम सर्वगुण संपन्न भू विक्रेता या उनको भूमिया कहे समझ नहीं आता जिन्हें बड़े-बड़े संभ्रांत धनवान शासन प्रशासन में ऊंची पहुंच व रसूख रखने वाले मान जान लोगों का सानिध्य प्राप्त होता है। ऐसे भू विक्रेता आमतौर पर किसान से सीधे बैनामा कर लेते औने पौने दामों पर फिर उसी जमीन को बेचते हैं। अपनी शर्तों और ऊंचे दामों। फिर वही सवाल घूम फिर कर आ गया जब इतना कुछ हो रहा तो प्लाटिंग अवैध कैसे । यह बात भी सही है जब इतना कुछ सही गलत जो भी हो रहा । लेकिन रजिस्ट्री बैनामा में स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया जा रहा है फिर प्लाटिंग अवैध कैसे और कैसे की जा रही है सरकार के राजस्व की चोरी। कृषि योग्य भूमि को आवासीय में परिवर्तित करने के लिए लैंड डाइवर्जन यानी की भू उपयोग परिवर्तन कहा जाता।क्योंकि बिना भू उपयोग परिवर्तन कराए कृषि योग्य भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाता। कृषि योग्य भूमि को आवासीय परिवर्तन करने के लिए धारा 143 /80 के तहत कार्यवाही की जाती है जिसमें राजस्व विभाग भूमि के हिसाब से शुल्क निर्धारित कर शुल्क को सरकारी खजाने में जमा करा कर कृषि भूमि को आवासीय में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को तमाम कागजी कार्यवाही के साथ पूर्ण करते। अधिकांश भू विक्रेता इस ताम झाम में ना पड़कर सीधे कृषि योग्य भूमि को बिना आवासीय कराए प्लाटिंग कर बेच रहे और अर्जित कर रहे काला धन। इस प्रकार से मानकों की धज्जियां उड़ाते प्लाटिंग कर बेचे जा रहे प्लाट को अवैध कहने में कोई हर्ज नहीं। क्योंकि भू परिवर्तन में लगने वाले धन एवं भूमि का मानचित्र के हिसाब से की जाने वाली प्लाटिंग पर चौड़ी रोड नाली पार्क जैसी अन्य सुविधाएं देना पड़ता जिसमें काफी जमीन चली जाती इस झंझट से बचने और झटपट जमीन बेचकर धन अर्जित करने के चक्कर में भू विक्रेता नहीं कराते कृषि योग्य भूमि को आवासीय घोषित और निरंतर करते रहते सरकार के राजस्व की चोरी के साथ मानक विहीन अवैध प्लाटिंग।




