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एक ऐसी कहानी, जो हर भारतीय के दिल को छू जाए?

एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ा पिता रहता था। उसका बेटा भारतीय सेना में शहीद हो गया था। घर में गरीबी थी, लेकिन पिता के सीने में गर्व था कि उसका बेटा देश के काम आया।

एक ऐसी कहानी, जो हर भारतीय के दिल को छू जाए?

 

🥹 “तिरंगे के नीचे सब बराबर हैं”

एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ा पिता रहता था। उसका बेटा भारतीय सेना में शहीद हो गया था। घर में गरीबी थी, लेकिन पिता के सीने में गर्व था कि उसका बेटा देश के काम आया।

एक दिन गाँव के स्कूल में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम था। बच्चे तिरंगा फहराने के लिए इकट्ठा हुए थे। तभी एक छोटे बच्चे ने बूढ़े पिता से पूछा—
“बाबा, आपका बेटा किस धर्म का था?”
बूढ़े ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, वह पहले भारतीय था।”
बच्चे ने फिर पूछा, “वह किस जाति का था?”
बूढ़े की आँखें नम हो गईं। उसने आसमान की तरफ देखा और कहा—
“बेटा, जब सीमा पर गोली चलती है,तो सैनिक की जाति नहीं पूछी जाती। जब तिरंगे में लिपटा उसका पार्थिव शरीर घर आता है, तो उसका धर्म नहीं पूछा जाता। उस समय पूरा देश सिर्फ इतना कहता है— भारत माता का वीर सपूत अमर रहे!”
इतने में वहाँ एक बुजुर्ग महिला आईं। उनके हाथ में फूल थे। उन्होंने शहीद के पिता के चरण छुए और कहा—
“भाई साहब, मेरा बेटा भी इसी देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ था।”
दोनों बुजुर्ग एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े। एक के माथे पर तिलक था, दूसरे के सिर पर टोपी।
बच्चे यह दृश्य देखकर चुप हो गए।
तभी शिक्षक ने बच्चों से कहा—
“बच्चो, याद रखना! देश को कमजोर करने के लिए दुश्मन को हमेशा सीमा पार से आने की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी वह हमारे बीच नफरत पैदा करके भी अपना काम कर जाता है। इसलिए किसी से उसकी जाति या धर्म के आधार पर नफरत करने से पहले यह जरूर सोचना कि इस मिट्टी की रक्षा में कितने लोगों ने अपना सब कुछ कुर्बान किया है।”

बूढ़े पिता ने अपनी जेब से बेटे की आखिरी तस्वीर निकाली। तस्वीर के पीछे लिखा था—

“पापा, अगर मैं वापस न आऊँ, तो मेरे लिए मत रोना। बस इतना करना कि मेरे देश में कोई हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई एक-दूसरे का दुश्मन न बने। क्योंकि मैंने जिस भारत के लिए जान दी है, वह सबका भारत है😭।”

यह पढ़कर वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।
तिरंगा हवा में लहरा रहा था। उसके तीन रंग मानो एक ही संदेश दे रहे थे— त्याग, शांति और हिम्मत।

❤️ कहानी की सीख?

मंदिर में प्रार्थना करने वाला भी इसी मिट्टी का बेटा है, मस्जिद में सजदा करने वाला भी। गुरुद्वारे में सेवा करने वाला भी हमारा अपना है और चर्च में दुआ माँगने वाला भी। हमारी पूजा-पद्धतियाँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारा देश एक है, हमारा संविधान एक है और हमारा तिरंगा एक है।
🇮🇳 हमारी पहचान सबसे पहले इंसानियत और भारतीयता है। नफरत की दीवारें मत बनाइए, मोहब्बत के पुल बनाइए। क्योंकि देश सिर्फ जमीन के टुकड़े से नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों के दिलों से बनता है।
जय हिंद! जय भारत! वंदे मात

सूर्या न्यूज 24 से रिपोर्टर नफीस खान की खास पेशकश🌷👏?

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