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नीट-कांड – मुंह से “लीकती” हुई सरकार

“नीट” (NEET) का पर्चा एक बार फिर लीक हुआ है।

नीट-कांड – मुंह से “लीकती” हुई सरकार
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“नीट” (NEET) का पर्चा एक बार फिर लीक हुआ है।

पिछले 10-12 वर्षों में प्रतियोगिता पेपर “लीक” की “घोषित” घटनाओं का यह आंकड़ा 90-95 के करीब पहुँच गया है। पूरी उम्मीद (आशंका) है कि अगले कुछ महीनों में यह आंकड़ा सौ तक पहुँच ही जाएगा। मोदी सरकार की विभिन्न ‘उपलब्धियों’ में ये एक ‘नायाब उपलब्धि’ है।

देश के लाखों छात्र-छात्राओं तथा उनके परिवारों के साथ यह एक खुला व निरंतर धोखा है ही, साथ ही साथ यह ये उस “विश्वास” के साथ भी धोखा है जो कि कोई भी नागरिक अपने देश में शैक्षिक परीक्षा प्रणाली अथवा संवैधानिक व्यवस्था के प्रति रखता है।

मेरे विचार में, दुनिया के कुल लगभग 195 देशों में हमारा देश भारत शायद “एकमात्र” ऐसा देश है जिसमें इतनी बड़ी संख्या या इतने बड़े पैमाने पर शिक्षा व रोजगार (परीक्षाओं या नियुक्तियों/साक्षात्कार आदि) के क्षेत्र में धांधली मचाई जाती है। और यह केवल केवल पिछले दो-चार-दस साल की बात नहीं है। इन का एक बहुत बड़ा और पुराना (दशकों पुराना) इतिहास रहा है। और ज्यादा बड़ी बात ये, कि ये सब “कांड” सिस्टम के नीचे या बीच के स्तर पर नहीं बल्कि उच्च (या उच्चतम) स्तर पर नियोजित व लागू किए जाते हैं। हाँ, यह बात अवश्य है कि मामला खुलने पर नीचे के दो-चार चपरासी, बाबूनुमा कर्मचारियों को बलि का बकरा बना कर मामला निबटा दिया जाता है ताकि बड़े आका लोग सुरक्षित रहें और सैकड़ों-हजारों करोड़ सालाना का ये “काला धंधा” बदस्तूर चलता रहे।

ये आसानी से समझा जा सकता है कि अगर एक बार भी ऐसे घिनौने अपराधों (पेपर लीक) के वास्तविक कर्ता-धर्ताओं को ऐसे मामलों में कड़ी सज़ा (उम्र कैद या मृत्यु दंड) दी गयी होती तो ऐसे अपराधों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता था।

आम तौर पर, न्यायपालिका की भूमिका भी ऐसे मामलों में संदिग्ध या ढुलमुल ही रही है। मध्यप्रदेश का बहुचर्चित “व्यापम” घोटाला और इससे जुड़ी लगभग 100 संदिग्ध मौतों/हत्याओं का मामला जगजाहिर है ही।

वैसे देश के अधिकांश प्रदेशों में ऐसे कई “व्यापम” आज भी हो रहे हैं। ये मौजूदा “नीट” का मामला इसका केवल नवीनतम नमूना है।

इस मामले में एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का नाम स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। इसका अर्थ एकदम स्पष्ट है। ये पूरा “लीक-कांड” कुछ टटपूंजिये भाजपाई नेताओं की काली करतूतें भर नहीं है। ऐसा बहुत संभव है कि ऐसे “कांडों” का पूरा नियंत्रण व संचालन सत्ता के उच्चतम स्तर से हो रहा है। इसीलिए, ऐसे मामलों में असली अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई आज तक नहीं हुई है।

इतनी महत्वपूर्ण परीक्षाओं को ईमानदारी, पारदर्शिता व शुचिता के साथ न करवा पाना सरकार (केंद्र व राज्य) की नालायकी व नैतिक नपुंसकता का सबसे बड़ा उदाहरण है। सरकार को चाहिए कि इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी से इसकी “समयबद्ध” तरीके से जांच कराये । अगर सरकार ऐसा करने में विफल रहती है तो ऐसा माना जाना गलत न होगा कि – “सरकार खुद इन घोटालों में शामिल है……!!!”

सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर इस मामले में मुकदमा दायर करने के साथ इसकी गहन जांच के आदेश देना चाहिए। किसी को भी लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य व भावनाओं से खेलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
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सूर्या न्यूज़ 24 से नफीस खान

Suraj Kumar

Chief Editor - Surya News 24 Edior - Preeti Vani & Public Power Newspaper Owner - Etion Network Private Limited President - Suraj Janhit Association Address - Deeh Deeh Unnao UP Office Address - 629,Moti Nagar Unnao

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