पुराने कानून (IPC) की धारा 323
पुराने कानून (IPC) की धारा 323 ही है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, पुराने कानून (IPC) की धारा 323 के स्थान पर आई है। यह धारा “स्वेच्छा से उपहति कारित करने” (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने) के अपराध से संबंधित है।

यहाँ इस धारा के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. उपहति (Hurt) की परिभाषा – धारा 115(1)
जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को शारीरिक दर्द, बीमारी या अंग-शिथिलता (infirmity) पहुँचाने के इरादे से या यह जानते हुए कोई कार्य करता है कि उससे चोट पहुँच सकती है, तो उसे “स्वेच्छा से उपहति कारित करना” कहा जाता है।
2. दंड का प्रावधान – धारा 115(2)
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाता है, उसे निम्नलिखित दंड दिया जा सकता ह
कारावास: जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है।जुर्माना: 10,000 रुपये तक का जुर्माना। दोनों: कुछ मामलों में जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
IPC 323 और BNS 115 में अंतर
मुख्य अंतर जुर्माने की राशि में है:
IPC 323: के तहत अधिकतम जुर्माना केवल 1,000 रुपये था।
BNS 115: में इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
अपराध की प्रकृति
असंज्ञेय (Non-cognizable): पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती (आमतौर पर)।
जमानती (Bailable): इसमें जमानत मिल जाती है।
शमनीय (Compoundable): कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष आपस में समझौता कर सकते हैं।
विचारणीय (Triable): किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई की जा सकती है।
विशेष नोट: यदि चोट किसी खतरनाक हथियार, जहर या किसी जानलेवा तरीके से पहुँचाई गई है, तो मामला धारा 117 (गंभीर चोट/Grievous Hurt) के अंतर्गत आएगा, जिसमें सजा और भी सख्त है।
क्या आप “गंभीर चोट” (धारा 117) के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?

