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वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने राज्यसभा चुनाव में मतदान से दूरी बनाने का कारण बताया।सुरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि वे कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्ध हैं और उन्हें कोई खरीद नहीं सकता।

राज्यसभा चुनाव से दूरी पर बोले वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा,कहा-सिद्धांतों के आधार पर लिया फैसला।

 

 

 

 विधायक ने कहा कि सिद्धांतों के आधार पर लिया फैसला,एडी सिंह के नाम से हुई निराशा। सुरेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि वे कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्ध हैं और उन्हें कोई खरीद नहीं सकता।

 

बगहा के लवकुश मैरेज हॉल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने राज्यसभा चुनाव में मतदान से अनुपस्थित रहने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

 

 

उन्होंने अफवाहों को खारिज करते हुए खुद को कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्ध बताया।

 

बिहार डेस्क, बगहा। बगहा नगर के पारस नगर स्थित लवकुश मैरेज हॉल में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने राज्यसभा चुनाव में मतदान से अनुपस्थित रहने के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी हैं।उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद महागठबंधन की कई बैठकों में भाग लिया,जिसमें दो बार तेजस्वी यादव के साथ बैठक भी हुई और केडी सिंह के नाम पर चर्चा की गई।विधायक कुशवाहा ने स्पष्ट कहा कि जिनका महागठबंधन के लिए कोई विशेष योगदान नहीं रहा,उनके समर्थन को उन्होंने उचित नहीं समझा।इसी कारण उन्होंने मतदान से दूरी बनाते हुए किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं देने का निर्णय लिया।अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ फैलाई जा रही बातें पूरी तरह निराधार है।उन्होंने कहा कि उन्हें गद्दार कहने वाले लोग खुद गलत हैं।उन्होंने दोहराया कि वे पहले भी कांग्रेस में थे और आगे भी कांग्रेस के साथ ही रहेंगे।“मुझे कोई खरीद नहीं सकता,मैंने यह फैसला अपने सिद्धांतों और नैतिकता के आधार पर लिया है।उन्होंने कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में एडी सिंह का नाम आने से निराशा हुई। एडी सिंह ने महागठबंधन के लिए कभी सक्रिय भूमिका नहीं निभाई और राज्यसभा सांसद रहने के दौरान भी क्षेत्रीय समस्याओं पर आवाज नहीं उठाई हैं। इसी कारण से मैंने मतदान से दूरी बनाई।अनुशासनात्मक कार्रवाई के सवाल पर वाल्मिकीनगर विधायक सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किसी प्रकार का दबाव नहीं था। न कोई बैठक हुई और न किसी पदाधिकारी का फोन आया। केवल चुनाव से एक दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष का व्हाट्सएप संदेश मिला था।

खरीदे जाने के आरोपों को खारिज करते हुए विधायक ने कहा कि सुरेंद्र कुशवाहा बिकाऊ नहीं हैं और उन्हें कोई खरीद नहीं सकता।राज्यसभा का चुनाव जो था उसे चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की तरफ से कोई आदेश नहीं था कि आपको वोट देना ही है।हमारे बिहार के अध्यक्ष कृष्ण राव,प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम सभी लोग का कहना था कि आप लोग स्वतंत्र हैं।जैसा आपका विचार करें।वैसा आप लोग कीजिएगा। राज्यसभा चुनाव में वोट देने की तेजस्वी जी की यहां जो बैठक चल रहा था।उसमें हिना जी का नाम सामने आया। सब लोग मदद करने के लिए तैयार थे।सब लोग काफी खुश थे। हिना जी के नाम को हटाकर तेजस्वी यादव का नाम आया तो हम लोग और भी खुश हुए ,लेकिन इस तरह मीटिंग हुआ।उसमें खाना पीना और बैठक हुआ और ए डी सिंह चुनाव लड़ने में नाम आया।आज तक ए ड़ी सिंह को कोई लोग जानते नहीं है। पहले भी वह राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। जनता के लिए उन्होंने कोई आवाज नहीं उठाया। उस व्यक्ति को दोबारा लाने का कोई मतलब नहीं था।इसलिए मेरे मन में यह हुआ कि घर पर हम सोए रहेंगे।वोट का बहिष्कार करेंगे।इसके चलते मैने यह निर्णय लेने को फैसला किया।उन्होंने कहा मिल हम लोग की लड़ाई बैकवर्ड की है,ओबीसी की है,दलित की है, अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक की है। सारे लोग के रहते हुए भी वह ऐसा उम्मीदवार है।जो हम लोग को नहीं पसंद आया। राज्यसभा चुनाव में दीपक यादव को दे सकते थे,मुकेश साहनी को दे सकते थे।हिना जी को दे सकते थे।तेजस्वी जी का डिसीजन गलत डिसीजन था। इसके चलते हम लोगों ने बहिष्कार किया।सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगर तेजस्वी जी डिसीजन बढ़िया लेते तो ऐसी परिस्थिति नहीं आता। बैकवर्ड से उम्मीदवार को लिए रहते तो आज का दृश्य कुछ और होता है।हम सभी लोग मिल जुलकर वोट दिए रहते और हम लोग के नेता भी चुने गए रहते हैं।महागठबंधन मजबूती के साथ लड़ता।सब लोग एकजुट होकर वोट करते हैं।वाल्मीकिनगर विधायक सुरेन्द्र प्रसाद ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा सुधार को सबसे ऊपर रखा।उन्होंने कहा कि उनका प्रयास होगा कि क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत बने कि जहां पहले बिहार के छात्र पढ़ाई के लिए उत्तर प्रदेश जाते थे,वहीं अब उत्तरप्रदेश के छात्र-छात्रा बिहार का रुख करें।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का करारा जवाब देते हुए एक बार फिर दोहराया कि उनका निर्णय पूरी तरह सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों पर आधारित है।

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