लाल-बगावत
आप कभी जाति, धर्म, राज्य
और हर वो चीज़ पूछते हैं…
जिससे नाप सकें आप अपना कद
अगर कोई निकला आपके कद से बड़ा…
तो उसे हर तरह निर्वस्त्र करने के साथ-साथ
मौत के घाट उतारने का लाइसेंस लेकर घूमते हैं!
क्या एक जीव होना और विश्व का हिस्सा होना
काफी नहीं?
सत्ता की गर्मी कहाँ लेकर जाएंगे?
एक दिन आप भी मिट्टी हो जाएंगे।
मैं सोचती हूँ-
ये सारे मापदंड जला दूँ…
कोई पूछे तो कहूँ
“मैं इंसान हूँ इंसानियत मेरा धर्म है
और यह संसार मेरा घर है।”
यह तो और बड़ा गुनाह होगा शायद?
उनके लिए जो नहीं चाहते कि-
उनके घर से बड़ा हो किसी का घर
या उनके जेब से ज़्यादा भरी हो जेब किसी मजदूर की।
मैं बगावत चाहती हूँ,
हर उस सोच के ख़िलाफ़
जो इंसान को इंसान नहीं मानता
और अपनी गर्मी को नमी देने के लिए..
दागता रहता है मानव और मानवता पर गोलियाँ।
– ममता कुमारी ‘मंटू’
पता- दिल्ली एन.सी.आर
छात्रा- दिल्ली विश्वविद्यालय

