35 फर्जी खतौनी घोटाले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ फिर एक नया मामला सामने?
35 फर्जी खतौनी घोटाले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ फिर एक नया मामला सामने?

बड़ी खबर उन्नाव से
सीलिंग भूमि पर भू-माफियाओं का कब्ज़ा? शुक्लागंज गंगाघाट में धड़ल्ले से अवैध प्लॉटिंग और निर्माण?
35 फर्जी खतौनी घोटाले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ फिर एक नया मामला सामने?
सूर्य न्यूज़ 24/ नफीस खान की विशेष रिपोर्ट

उन्नाव/शुक्लागंज गंगाघाट। प्रदेश सरकार जहां एक ओर भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं शुक्लागंज गंगाघाट क्षेत्र में सीलिंग एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्ज़ा, प्लॉटिंग और निर्माण का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के अनुसार, संबंधित गाटा संख्या 25क की भूमि राजस्व अभिलेखों में “6-2/अकृषिक भूमि – सड़क, स्थल आदि उपयोग” श्रेणी में दर्ज है। इस श्रेणी की भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित मानी जाती है। इसके बावजूद, इस भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिक्री किए जाने और उस पर निर्माण कार्य कराए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
भूमि का विवरण:
गाटा संख्या: 25क
श्रेणी: 6-2/अकृषिक भूमि (सड़क, स्थल आदि सार्वजनिक उपयोग)
क्षेत्रफल: लगभग 0.2000 हेक्टेयर
राजस्व: शून्य
राजस्व अभिलेखों में शून्य राजस्व और सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह भूमि निजी खरीद-फरोख्त अथवा आवासीय निर्माण के लिए अनुमन्य नहीं है। इसके बावजूद, मौके पर चारदीवारी, प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियां जारी होने की जानकारी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि के आसपास तेजी से निर्माण कार्य हो रहा है। कच्चे रास्ते के निकट प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं और कई स्थानों पर निर्माण की तैयारियां भी देखी जा सकती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह भूमि वास्तव में सार्वजनिक उपयोग अथवा सीलिंग श्रेणी में दर्ज है, तो फिर इस पर अवैध कब्ज़ा और निर्माण किसके संरक्षण में हो रहा है? क्या संबंधित राजस्व विभाग, स्थानीय प्रशासन या अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस गतिविधि से अनजान हैं, या फिर उनकी कथित मिलीभगत से यह खेल चल रहा है?
यह मामला न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली और भू-माफियाओं पर अंकुश लगाने के दावों की भी परीक्षा लेता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
